जालंधर.
शहर में ब्राडबैंड व अन्य सेवाएं दे रहीं टेलीकॉम कंपनियों ने नगर निगम को पिछले 10 साल से फीस नहीं चुकाई है। निगम ने पिछले वर्षों में कंपनियों को 100 से ज्यादा मंजूरी दी हैं। इन सभी मंजूरियों के लिए कंपनियों ने निगम को फीस देनी होती है। निगम की अब तक की रिपोर्ट के मुताबिक इन कंपनियों से आठ करोड़ वसूल करने हैं।
मेयर वनीत धीर ने इस पूरे मामले में बीएंडआर ब्रांच से रिपोर्ट लेने के बाद डिफाल्टर कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। टेलीकाम कंपनियों ने पिछले दस साल से खंभे लगाने और अपने मैनहोल तैयार करने की मंजूरी ली थी। सड़कों को इसके लिए इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसान के लिए निगम फीस लेता है। मेयर ने टेलीकाम कंपनियों की परमिशन की पुरानी फाइलें निकलवा कर लिस्ट बनाने के निर्देश दिए थे।
कंपनियों को हुआ काफी नुकसान
मेयर ने बीएंआर डिपार्टमेंट के एसई रजनीश डोगरा को बुलाकर निर्देश दिया कि इन कंपनियों से फीस वसूल करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। जो कंपनियां फीस नहीं देती हैं, उन्हें नोटिस जारी किया जाए। इन कंपनियों का तार बिछाने का काम भी रोक दिया जाए। इन कंपनियों के कारण निगम को काफी नुकसान हुआ है। कंपनियों ने कई जगह सड़क तोड़ी है, लेकिन इनको रिपेयर करने का काम निगम को करना पड़ा।
कई जगह अंडरग्राउंड तारें डालते समय निगम के सीवरेज व पानी के अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। दैनिक जागरण ने प्राइवेट टेलीकाम कंपनियों के कारण शहर में जगह-जगह लटक रही तारें, बेतरतीब लगे खंभे और सड़क की खोदाई से लोगों की परेशानी और शहर की इमेज बिगड़ने का मुद्दा उठाया था। तब डीसी ने इन कंपनियों को चेतावनी दी थी।


