ढाका
बांग्लादेश के चुनाव में इस बार कई बड़े अपराधियों को भी टिकट दिया गया था। इसमें जमात के अजहरुल इस्लाम का भी नाम है। उसपर 1971 के युद्ध के दौरान 1200 लोगों के कत्ल और 13 रेप का आरोप था। उसे दोषी भी ठहराया गया था।
बांग्लादेश में कराए गए 13वें आम चुनाव में तारिक रहमान की अगुआई में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। इनमें से कई ऐसे उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की है जिनपर कभी आतंकवाद का ठप्पा लगा हुआ था। ऐसे दो प्रत्याशी बीएनपी से और एक जमात-ए-इस्लामी से है। शेख हसीना की सरकार गिरने से पहले इनमें से एक को फांसी की सजा सुना दी गई थी। हालांकि जब शेख हसीना की सरकार गिरी और मोहम्मद यूनुस की अगुआई में अंतरिम सरकार गठित की गई तो उनकी सजा भी माफ करदी गई।
बीएनपी नेता लुफ्तोज्जमान बाबर और अब्दुस सलाम पिंटू दोनों ही बीएनपी के नेता हैं जिनपर गंभीर आरोप थे। वहीं जमात-ए-इस्लामी नेता अजहरुल इस्लाम पर आतंकवाद और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। दिसंबर 2004 में ही बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने तारिक रहमान, लुत्फोज्जमान बाबर औ अन्य आरोपियों को 2021 के ग्रैनेड कांड मामले में बरी कर दिया था। उनपर शेख हसीना पर ग्रैनेड अटैक करवाने का आरोप था। इस हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए थे। वहीं शेख हसीना की जान किसी तरह बच गई थी।
लुत्फोज्जमान बाबर ने इस बार 1.6 लाख वोटों से चुनाव जीता है। उनकी ही पार्टी के अब्दुल सलाम पिंटू पर भारत विरोधी संगठन से संपर्क रखने का आरोप था। बाबर के बरी होने के एक साल बाद पिंटू को भी कोर्ट से राहत मिल गई। पिंटू पर पाकिस्तानी आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी से जुड़े रहने का भी आरोप था। इस संगठन पर यूपी के वाराणसी में 2006 में बम ब्लास्ट करवाने और 2007 में अजमेर शरीफ की दरगाह में और दिल्ली में 2011 का बम ब्लास्ट करवाने का आरोप है। पिंटू ने इस चुनाव में दो लाख मतों के अंतर से जीत हासिल की है।
तीसरे नेता की बात करें तो उनका नाम एटीएम अजहरुल इस्लाम हैं जो कि जमात के सीनियर नेता हैं। 1998 में से ही वह राजनीति में किस्मत आजमा रहे थे हालांकि किस्मत का ताला इस बार खुला है। वह 2012 से जमात-ए-इस्लामी में महासचिव के पद पर हैं।
क्या हैं अजहरुल इस्लाम पर आरोप
अजहरुल इस्लाम पर 1971 के युद्ध में 1200 से ज्यादा लोगों की हत्या करने का आरोप है। उसपर 13 रेप केस भी हैं। 2014 में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने उसके सारे अपराध माफ कर दिए और सजा रद्द हो गई। भारत के नजरिए से देखें तो बांग्लादेश की हालत बहुत सुधरने वाली नहीं है। वहीं तारिक रहमान के रवैये पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत है।

